अष्टछाप के कवियों में श्री गोविंदस्वामीजी का व्यक्तित्व सबसे निराला और थोड़ा ‘अक्खड़’ माना जाता है। वे स्वभाव से बहुत ही निडर, स्पष्टवक्ता और थोड़े क्रोधी भी थे, लेकिन प्रभु के प्रति उनका प्रेम इतना गहरा था कि स्वयं श्रीनाथजी उनके साथ लुका-छिपी खेलते थे।
गोविंदस्वामीजी के बारे में प्रसिद्ध है कि वे पहले एक डाकू (लुटेरे) थे, लेकिन एक बार विट्ठलनाथजी (गुसाईं जी) के दर्शन मात्र से उनका हृदय परिवर्तन हो गया और वे ‘महाप्रभु’ के चरणों में समर्पित हो गए।
श्री गोविंदस्वामीजी: “जब प्रभु हार गए”
गोविंदस्वामीजी गोवर्धन की कंदराओं और ‘कदंब खंडी’ में निवास करते थे। वे अपनी गायें चराते थे और वहीं बैठकर पद गाते थे। उनके बारे में एक बहुत ही सुंदर प्रसंग प्रचलित है:
कहा जाता है कि गोविंदस्वामीजी जब एकांत में बैठते, तो साक्षात बालकृष्ण (श्रीनाथजी) उनके पास खेलने चले आते थे। वे दोनों साथ में कंच (कंचे) खेलते थे। एक दिन खेल-खेल में श्रीनाथजी हार गए, लेकिन बालक स्वभाव के कारण उन्होंने अपनी हार मानने से मना कर दिया और भागने लगे।
गोविंदस्वामीजी ने उन्हें दौड़कर पकड़ लिया और बोले— “ठाकुर जी! ऐसे नहीं चलेगा। आप हार गए हैं, तो आपको दांव (बारी) देनी ही होगी। भगवान होने का मतलब यह नहीं कि आप खेल में बेईमानी करेंगे!”
तभी मंदिर की आरती का समय हो गया और श्रीनाथजी वहां से अंतर्धान होकर सीधे मंदिर पहुंच गए। जब गोविंदस्वामीजी मंदिर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि ठाकुर जी के होंठों पर वही शरारती मुस्कान थी। उन्होंने पद गाया:
“खेलत में को काको गोसैयां…”
(खेल में कौन किसका स्वामी? जो हारता है, उसे दांव देना ही पड़ता है!)
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कदम की छाया और तानसेन
गोविंदस्वामीजी संगीत के इतने बड़े विद्वान थे कि सम्राट अकबर के दरबारी गायक तानसेन भी उनसे संगीत सीखने की इच्छा रखते थे।
एक बार तानसेन छिपकर गोविंदस्वामीजी का गायन सुनने पहुंचे। गोविंदस्वामीजी एक पद गा रहे थे। जब उन्होंने तानसेन को देखा, तो वे रुक गए। तानसेन ने प्रार्थना की कि वे आगे गाएं, लेकिन गोविंदस्वामीजी ने कहा— “मैं किसी इंसान को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि अपने ‘गिरिधर’ को रिझाने के लिए गाता हूं।”
गोविंदस्वामीजी की शिक्षा: “सहज प्रेम”
* अधिकार का भाव: वे प्रभु को भगवान की तरह दूर से नहीं, बल्कि एक बराबर के मित्र की तरह देखते थे।
* वैराग्य: उन्होंने अपनी सारी धन-संपत्ति और पिछला जीवन त्याग कर गोवर्धन को ही अपना घर बना लिया था।